बुधन चचा और 4G मोबाइल ।मगही कहानी । गाँव के चौपाल भाग -1 ।

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Budhan chacha aur 4G mobile new magdhi story
बुधन चचा और 4G मोबाइल ।मगही कहानी । गाँव के चौपाल भाग -1 । 

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"ई जे पूरा जी के जंजाल है ना! ई सब मोबाइल ही है। सब लइकन दिन भर  एकरे में घुसल रहअ है। ना पढ़े के चिंता रहअ है औ ना कोई काम-धंधा के। बस खाली ओकरा खाय के कहीं से मिल जाय के चाही।" इ बात हमर बुधन चचा भोरही से बक रहलथिन हल . हम अपन खाट पर बैठ के समसंग (सैमसंग ) के 4G सेट में प्रिंसवा  के विगो (Vigo) विडियो देख रहली हल. चचा के आवाज प्रिंसवा के आवाज से काफी तेज हलै.मगर गौर से समझहू त चचा के आवाज तेज ना हलैं बल्कि हमर मोबाइलबे (Mobile) के आवाज ही कम हलै . गांव के सब लइकन कह हली जब भी मोबाइल लिहअ तब ब्रांड मोबाइल लियह. औ उ सब के चक्कर में हमहूं रेडमी,लावा, माइक्रोमैक्स के छोड़ के समसंग (सैमसंग ) के मोबाइल ले लियो. मगर सही कहियो त एकरा से मन न भर हको . ना ज्यादा आवाज हको ,न ज्यादा  मेमोरी देलको हे .मोबाइल भी  हैंग ओतने कर हको की तोरा समझ न ऐतो की का करी ना करी . तुरंत स्क्रीन बंद होतो औ तुरन्ते खुलतो . आज आधा घंटा में बढियां से चारो-पांच विडियो ना देखलियों हैं औ उपर से बुधन चचा अलग दिमाग खराब कैले हखुन . एक तो हम मोबाइल और चचा से परेशान हैए हियो मगर जियो भी  अलग से परेशान कर के रखले हो . अगर तोरा विगो विडियो  (Vigo Video ) भी डाउनलोड करे के हको त डाउनलोड में लगा के तू खेतो-खरिहान से लौट आ जइबअ  तभियो ना पूरा डाउनलोड होतो .

बुधन चचा और 4G मोबाइल ।मगही कहानी । गाँव के चौपाल भाग -1 । 


'कल तोरा आलू उखाड़े बोललू हल ता काहे न गेनी हल रे चुनुआ " चचा खटिया के पास आके कहलखिन .
"कल स्कुल न चल गेली हल चचा, उही से आलू खेत ना जा पैली."
"अरे तू तो पढ़ के नेहाल कर देमी ,जे कातो दिन-भर मोबाइल में  घुसल रहती उ पढाई कर लेती!" चचा ताना मारते कहलखिन .
हमहूँ चचा के इ बाद महीनों से सुन-सुन के परेशान होबल हली .हमरो रहल ना गेली.
"तोरा कौन कहअ हको की जे मोबाइल रखअ हैं उ न पढाई करअ है ? .अब आधा से ज्यादा लईकन  तो मोबाइल से ही पढाई कर रहले हैं."
"कौवा से ज्यादा ,कौवा के बचबे चलाक होवअ हैं . सब केतना मोबाइल से पढ़अ है जे हमनी से छुपल हैं का ?" चचा गोस्सा में बोललखिन .
"देश के प्रधानमंत्री मोदी जी गाँव -गाँव के काहेला डिजिटल कैले ह्खिन ? एही चलते न की सब लईकन इन्टरनेट से पढ़े -लिखे और काम काज करे." हम चचा के बात के लगभग गलत सावित करते जैसन बोलली.
"मोदी जी कहअ  हखिन,हम भारता के  सभी गाँव के डिजिटल कर दिए हैं. लेकिन उ जेतना के डिजिटल न कैलथिन ओकरा से ज्यादा सब के बुड़बक कर देलखिन. सब खाली दिन-दिन भर विडियो-फिलिम देखे में लगल रहअ है ."

बुधन चचा और 4G मोबाइल ।मगही कहानी । गाँव के चौपाल भाग -1 । 


चचा के इ बात सुन हमरा लगली आज  कैसहूँ कर के चचा के मुंह बंद कर दीऐ ताकि अगला दिन से मोबाइल के बारे में कुछहूं ना बोलथिन  एही से हम बोलली ," चचा मोबाइल के कारण ही आज घर बैठे ही सब लोग से भेट-मुलकात औ बात-चित कर लेहू .अगर मोबाइल ना रहतो हल ता इ सब करना केतना मोश्किल रहतो हल ?"
इतना सुनला के बाद चचा कुछ सेकंड तक चुप-चाप खड़ा रहलखिन त हमरा लगली अब कुछो ना बोलथिन मगर कुछ समय बाद बोललखिन ,"इ मोबाइल त परिवार से औ दूर कर देलकी , पहले जहाँ सब महिना-दो महिना में एक बार घर आके अपन परिवार साथै रहअ हली , मिलअ हली ,ओकर देख-भाल करअहली आज एकरे कारण सब दुरे से बात-चित करअ है . दुरे से भेट-मुलकात (विडियो कॉल से ) कर लेह .ना कोई घरे आव है , न परिवार के साथ समय बितावअ है . सब अपन परिवार से दूर होबल रहअ हैं . कोय-कोय तो बीमार माय-बाप से खाली फ़ोन पर ही बात-विचार करअ हैं . अब बताही जे आदमी बीमार हैं ओरा खाली फोन पर बात-विचार औ फोने से हाल-समाचार ले लेवे से ठीक हो जैतै.की ओकरा आके सेवा पानी करे परतै"
चचा के इ बात हमरे मुंह बंद कर देलकी औ सोच में भी पड़ा देलकी . चचा सही कहलखिन सब लोग दूर-दूर रहअ हैं अपन घर-परिवार छोड़ के . दू-दू तीन-तीन साल घर ना आवअ है . खाली फ़ोन से बात-विचार करअ हैं . ओएसन में घर पर बूढी माय-बाप के कौन ख्याल रखअ होतै? . उ दिन हमरा समझ आ गेली टेक्नोलॉजी के लिमिट भर इस्तेमाल करें और कुछ समय परिवार के साथ देबे खोजै हैं . लईकन के भी मोबाइल में ज्यादा समय देबे से अच्छा घर के काम-काज में थोडा-बहुत मदद करे खोजे  है .

©अविनाश अकेला ( मेरे बारे में जानने के लिए यहाँ click करें )
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