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Thursday, October 17, 2019

मुर्ख साधू और ठग -पंचतंत्र की कहानी ! The Follish Sage And Swindler ! Panchatantra Stories In Hindi

मुर्ख साधू और ठग - पंचतंत्र कहानी ! The Follish Sage And Swindler! Panchatantra Stories In Hindi 

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एक बार की बात हैं . किसी गाँव के मंदिर में देव शर्मा नाम का एक प्रतिष्ठित साधू रहता था . गाँव में सभी उसका सम्मान करते थे .उसे दान में अपने भक्तो से तरह- तरह के वस्त , उपहार ,खाद्ध समाग्री मिलता था . जिसे बेच कर वो साधू ने बहुत सारी धन जमा कर लिया था .
     साधू कभी किसी पर विश्वास नही करता था और हमेशा अपनी धन के सुरक्षा के लिए चिंतित रहता था .वह अपनी धन को एक पोटली में रखता था और उसे हमेशा अपने साथ ही लेकर चलता था .
 जिस गाँव में साधू रहता था उसी गाँव में एक ठग भी रहता था . बहुत दिनों से उसकी निगाह साधू के धन पर थी .ठग हमेशा साधू का पीछा किया करता था , लेकिन साधू उस गठरी को कभी अपने से अलग नही करता था .
आखिरकार , उस ठग ने एक छात्र का वेश धारण किया और उस साधू के पास गया .उसने साधू से मिन्नत किया कि की वह उसे अपने शिष्य बना ले क्योकि वह ज्ञान प्राप्त करना चाहता था .साधू तैयार हो गया और इस तरह से वह ठग साधू के साथ मंदिर में ही रहने लगा .
 ठग मंदिर की साफ़-सफाई के साथ -साथ अन्य सारे काम करता था और ठग ने साधू की भी खूब सेवा की और जल्द ही उसका विश्वाशपात्र बन गया .
एक दिन साधू को पास के गाँव में एक अनुष्ठान के लिए आमंत्रित किया गया , साधू ने आमंत्रण को स्वीकार किया और निश्चित दिन साधू अपने शिष्य के साथ अनुष्ठान में भाग लेने निकल पड़ा . रास्ते में एक नदी मिला , साधू ने स्नान करने की इच्छा जाहिर किया . उसने पैसों  की गठरी को एक कम्बल की भीतर रखा और उसे नदी के किनारे रखा दिया . उसने ठग से समान  की रखवाली करने को कहा और खुद नहाने चला गया .ठग को तो कब से इसी पल का इंतजार था जैसे ही साधू नदी में डुबकी लगाने गया , वह रुपयों की गठरी लेकर चम्पत हो गया .





इस कहानी से हम क्या सिंखे :-

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती हैं कि सिर्फ किसी भी अजनबी की चिकनी-चुपड़ी बाते सुनकर हमें किसी अजनबी पर दिल खोल कर विश्वास नही करनी चाहिए . जब तक हम उसके बारे में सही जानकारी एवं उसके चरित्र ना पता कर ले  तब तक ऐसे लोगों से दूरी बना कर रहना चाहिए .
स्रोत - पंचतंत्र 
लेखक - विष्णु शर्मा 

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