गूगल वेबमास्टर कांफ्रेंस 2019 पटना का यात्रा अनुभव एवं गूगल वेबमास्टर से जुडी महत्वपूर्ण जानकारियां - यात्रा वृतांत

गूगल वेबमास्टर कांफ्रेंस पटना के यात्रा अनुभव एवं गूगल वेबमास्टर कांफ्रेंस से जुडी कुछ जानकारियां 

google-webmaster-confrence-patna-2019-.jgoogle-photo-icon-jpg



आपको इस  पोस्ट की टाइटल देख कर ही समझ आ गयी होगी कि मैं इस पोस्ट में किस चीज के बारे में बात करने वाला हूँ . पाठक मैं आपको बता दूँ  कि गूगल वेबमास्टर कांफ्रेंस  क्या हैं ?
               ' गूगल वेबमास्टर कांफ्रेंस ' गूगल द्वारा आयोजित एक समारोह होती हैं . जो गूगल पत्येक वर्ष भारत के कई शहरों में आयोजित करती हैं .  गूगल  इस तरह के सामारोह पत्येक वर्ष अपने पार्टनर ( ब्लॉगर / youtuber ) के लिए आयोजित करती हैं . जिसमे गूगल अपने उत्पादन  या  सर्विस सबंधित कई महत्वपूर्ण जानकारियों को अपने पार्टनर के साथ साझा (Share ) करती हैं . और इस बार गूगल द्वारा आयोजित गूगल वेबमास्टर कान्फ्रेंस में मैं भी गया हूँ . यह आयोजन पटना शहर के एक नामचीन होटल में संचालित कि गयी थी . इस पोस्ट मैं गूगल वेबमास्टर कान्फ्रेंस से जुडी जानकारी के साथ अपने यात्रा वृतांत के अनुभव को भी आप से साझा करूंगा .

( 23/06/2019  , 03:00 PM  , नालंदा बिहार  )

           दोपहर के 3 बज रहे थे . मेरे हाथों में ऑनर कम्पनी के एक स्मार्ट फोन थी जो पिछले कई महीने से इसे मैं इस्तेमाल करता आ रहा हूँ .मेरे गाव में जिओ के नेटवर्क प्रोब्लम अक्सर रहती हैं यही कारण था कि उस समय भी मेरे मोबाइल में नेटवर्क कि  प्रोब्लम थी . मैं अपने whatsapp अकाउंट में कुछ मैसेज को पढ़ रहा था परन्तु इन्टरनेट धीमी रहने के कारण मैसेज भी जल्दी से updates नही हो रही थी . ईसी बीच मेरे whatsapp  में
 " बिहारी ब्लॉगर "नामक  ग्रुप में कुछ मैसेजे आये हैं . मैसेज पढकर मैं आश्चर्यज था . आश्चर्यज होता भी क्यों नही ? मेरे सभी मित्रों के गूगल वेबमास्टर कांफ्रेंस के लिए आमंत्रण मेल आया हुआ था परन्तु मेरा सामारोह के एक दिन पहले तक भी आमंत्रण मेल नही आया था .
  खैर ! मेरे सभी मित्रो ने समझाया  , " परेशान मत हो . मेल मिल जाएगी "
उनलोगों की बात सही हुई और वास्तव में मुझे गूगल वेबमास्टर कांफ्रेंस पटना के आमंत्रण मेल की व्यवस्ता हो चुकी थी जिसमे अजय कुमार चौधरी जी का प्रयास काबिले तारीफ रही . अगर एक शब्दों में बोलूं तो अजय कुमार चौधरी जी ने ही आमंत्रण मेल का व्यवस्ता किया .

         
( 24/06/2019 ,  06:00 AM , नालंदा , बिहार  )

     मैं  सफ़ेद शर्ट और ब्लू जींस पहन रखा था साथ ही  कंधे पर हरे रंग कि एक बैग टांग रखे थे . मैं अपने गावं से निकल कर सडक पर खड़ा था .  यही वो जगह थी जहाँ से मैं और मेरे गावं के अलावे यहाँ के नजदीकी 4-5 गावं के सभी लोग इसी जगह से बस पकड़ने के लिए आते हैं .मैं ये नही कहूँगा कि मैं उस वक्त हीरो जैसा दिख रहा था परन्तु इतना जरुर कहूँगा , मूझे गूगल वेबमास्टर कांफ्रेंस में जाने की ख़ुशी एसे महसूस हो रही थी जैसे मैं किसी फ़िल्मी हिरोइन से मिलने जा रहा हूँ .
         बस आयी . मैं लोगो के धक्के सहते हुए खिड़की वाली सीट पर बैठ गया .  वैसे मैं कही भी बस से सफर करता हूँ तो मैं बस कि खिड़की वाली जगह पर ही बैठता हूँ . मुझे बस कि खिड़की से बाहर के नज़ारे देखने में काफी मजा आता हैं . मैं बस के खिड़की से बाहर के नजारे देख रहा था . मैं आगे की तरफ भाग रहा था और सारे  पेड़ पौधे पीछे की ओर . ऐसा लग रहा था , मैं कोई भारतीय नेता हूँ और भारतीय खजाने लुटने के बाद आगे भाग रहा हूँ और पेड़ पौधे यहाँ की सभी जनता हैं जो अपनी गरीबी लाचारी , बेरोजगारी , बीमारी और अशिक्षा के के कारण अपने जीवन में आगे के वजाय पीछे की तरफ भाग  रहा हो .
         मेरी नजरे बाहर टिकी थी तभी मेरे मोबाइल पर एक करीबी मित्र का फ़ोन आया . मैं अपनी नजरे को बाहर से हटा कर अपने मोबाइल फ़ोन पर टिकाया और कॉल को रिसीव किया . ये  मित्र भी उस गूगल वेबमास्टर कांफ्रेंस में आ रहे थे .

( 24/06/2019 ,  08:05 AM , पटना , बिहार  )

हम सभी मित्र उस होटल के पास पहुँच चुके थे जहाँ गूगल वेबमास्टर कान्फ्रेंस होने वाली थी . वहां पर कुछ पुराने मित्र तो कुछ नये मित्रों से भी मुलाकात हुई .हम आपस में मिलने के बाद हम लोगो ने होटल के अंदर प्रवेश किया . ये समारोह होटल के दूसरी मंजिल पर होनी वाली थी इसलिए हम सभी मित्रों ने होटल की लिफ्ट से दूसरी मंजील पर पहुचं गये .
   यहाँ पर काफी सारे लोग पहले से ही पहुँच चुके थे . यहाँ पर आकर आज पहली बार एहसास हुआ था कि वास्तव में भारत में पुरुष के अपेछा महिलाये की लिंगानुपात काफी कम हैं . इतने लोगो में मात्र गीनी - चुनी 3-4 लड़कियां थी और बाकि के सारे पुरुष लोग ही थे .
        09:30 AM में निबंधन करा कर सभी लोगो को चाय -बिस्किट के नाश्ते करा कर  समारोह हॉल में बैठाया गया . उसके बाद हम सभी को गूगल डेवलपर द्वारा सेशन को शुरू किया गया . जिसमे सभी लोगो को गूगल से सबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां साझा ( Share ) किया गया .
        पता हैं ! मैं स्कुल समय से ही पहली बेंच या पहली पंक्ति में बैठने वाला लड़का हूँ परन्तु यहाँ आकर आज पहली बार पिछली टेबल पर बैठा था क्योकि मुझे सेमिनार  हॉल के अंदर जाने से पहले ही लोग अपनी -अपनी सीटें से  चिपक कर बैठ गये थे .



( 24/06/2019 , 10:35 AM , लेमन ट्री होटल ,पटना , बिहार  )
 सेमिनार हॉल )

हमारा पहला Setions 10:35 AM में शुरू हुआ . हमारी मुलाकात गूगल डेवलपर सैयद मलिक सर से हुआ . इन्होने सबसे पहले दिन भर के सभी  Setions के बारे में थोड़ी डिस्कस किया उसके बाद वह गूगल के बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारियाँ  शेयर किया . सैयद मलिक सर ने गूगल के अल्गोरिथम को कुछ बेसिक चीजे समझाया ताकि हम अपनी article को आसानी से गूगल में सर्च seo कर हम उसे रैंक करवा सके .
          एक घंटे बाद यह शेसन समाप्त हो गयी मैं भी इस शेसन को सुनकर थोडा थका हुआ महसूस कर रहा था . अपनी थकान को थोडा कम करने के लिए टेबल रखी पानी को उठा कर एक - दो घुट गले में उतार लिया . पानी पीन के बाद टेबल पर रखी चॉकलेट खोल कर अपनी मुंह में डाल  कर उसे एन्जॉय कर रहा था , हालाकिं चॉकलेट कुछ खाश नही थी . मगर मैं उनलोगों में से नही हूँ जो मुफ्त के चीजो में भी कमियां निकालूं .
    गूगल द्वारा दिए गये डायरी के पन्ने को उल्ट - पलटकर  देख रहा था . तभी मेरे कानो में एक मीठी आवाज सुनाई पड़ी . वाह ! मेरे मुंह से  यह शब्द अचानक निकल पड़ा . 
                            नीली आंखे , लम्बी बाल ,स्लिम बॉडी , खुबसूरत चेहरा और  हरे रंग कि जींस - कुर्ती पहनी एक प्यारी से लडकी स्टेज पर माइक लिए गूगल के बारे में बात शुरू कर चुकी थी . उम्र यूँही 23-24 साल होंगे . 
 हमारा  दूसरा  शेसन शुरू हो चूका था .मेरी आंखे बिल्कुल खुली के खुली रह गयी . मैंने सोचा था गूगल सिर्फ पुरुष लोग के ही जॉब देती हैं परन्तु यहाँ देखने के बाद लगने लगा सिर्फ पुरुष ही नही बल्कि महिलाओं  के अलावे खुबसुरत महिला को भी जॉब देती हैं . हमारी अगले  शेसन में वह वेब सेक्रिट्री पर बातें कर रही थी .
 वो हमलोगों  को जानकारियां शेयर करने पर ध्यान दे रहीं  थीं और मैं उन पर .
वैसे मैं आपलोग को यहाँ समझा देना चाहता हूँ .मैं उन पर गंदी नजर वाली ध्यान नही दे रहा था बल्कि एक Teacher और Student वाली ध्यान थी . शायद , आपको याद होगा जब आप छोटे होंगे तब आप स्कुल कि दिनों में  अपनी स्कुल के किसी एक Teacher से आप ज्यादा जुड़ाव महसूस करते होंगे . हमेशा लगता होगा .  काश ! पूरा दिन क्लास में सिर्फ यही Teacher रहे और आप उनसे बहुत प्यार करते होंगे .
   मैं भी इनको देख कर यही फिलिंग कर रहा था और सोच रहा था यार ! पूरा दिन इन्ही कि  शेसन रहे और यह  हमलोग के सामने ही  रहें . 
   खैर ! एक घंटे बाद इनका भी सेशन खत्म हो गया और इनके बारे में सोचते - सोचते  अगली सेशन भी समाप्त हो गयी . 

avinash-akela-photo-google-webmaster-confrence-photo-avinash-akela-jpj


( 24/06/2019 , 01:00 PM , लेमन ट्री होटल ,पटना , बिहार  )

लंच फ्लोर 


अब दोपहर के एक बज चुके थे और हमलोगों के लंच के समय भी हो चूका था . सभी लोग सेमिनार हॉल से बाहर निकल कर लंच वाली फ्लोर पर खड़े थे . मैं भी सभी लोगो के तरह प्लेट लेकर अपनी बारी का इंतजार कर रहा था परन्तु मेरी बारी आने कि नाम ही नही ले रही थी .हम बिहारियों या यूँ कहे हम इंडियन में एक बहुत बड़ी बीमारी हैं - संयम ना बरतने की .
   लोग किसी भी कतार में क्यों ना खड़ी हो , वो अपनी चालाकी या यूँ कहे पैरवी लगा ही देते हैं .अगर हम भारतीय रेलवे टिकेट  के लिए लाइन में खड़ी हैं तो वहां भी अपने से अगले व्यक्ति को यह बोल कर टिकेट कटवा लेते हैं - भैया मेरा ट्रेन आने वाली हैं आप टिकेट कटा कर हेल्प कर दीजिये या फिर अपनी तबियत का हवाला देकर टिकेट ले लेते हैं .
       अगर आप बस में खड़े हो तो बगल वाले सीट पर अपनी पैर का दर्द या वोमेटी (उल्टी ) होने के बहाने बाताकर अडजस्ट कर लेते हो . लंच के समय यहाँ भी कुछ यही नजारा था . मैं कब से लाइन में खड़ा था परन्तु पीछे वाले भाई साहब सब अपनी चालाकी से पहले ही खाने दबा रहे थे . मैं यहाँ किसी का सिकायत नही कर रहा हूँ . ये आदत हम भारतीयों में जन्म से ही पाया जाता हैं .जैसे जब बचपन में माँ आइसक्रीम नही देती थी तो हम रो कर पैरवी करा ही लेते थे .उसी तरह आज भी हम भारतीये हर काम में किसी न किसी तरह पैरवी लगा ही लेते हैं . खैर ! कुछ समय बाद मैं भी भोजन कर लिया . भोजन काफी स्वादिस्ट थी , खाने के आइटम यहाँ नही बताना चाहूँगा बाकि यूँ समझ लीजिये मैंने पुरे आइटम का संख्या में से 70 % आइटम संख्या में से मात्र सभी में से 1-2 चमच ही लिया था और पेट पूरी तरह से भर गया था .  इसके बाद मिठाइयाँ खाने के बाद पुनः सेमिनार हॉल में चला गया .

( 24/06/2019 , 02:05 PM , लेमन ट्री होटल ,पटना ,  सेमिनार हॉल )

अब हमारी अगली सेशन शुरू हो चूका था . सभी ब्लॉगर और youtuber सेमिनार हॉल में आकर बैठ चुके थे . इस सेशन के बाद एक ग्रुप सेल्फी हुआ या इसे ग्रुप फोटो भी कह सकते हैं जो गूगल के द्वारा किया गया . सभी लोगो ग्रुप फोटो में भाग लीया परन्तु मैंने इस ग्रुप फोटो में भाग नही लिया क्योकिं मैं फोटो में फ्रंट में दिखना चाहता था परन्तु लोग लम्बाई के हिसाब से खड़े थे और लम्बाई में मैं सबसे बड़ा था ( बड़ा था या नही पता लेकिन उस लम्बाई के हिसाब से मैं पीछे आ रहा था ) जिसके कारण मुझे पीछे खड़ा होना था इसलिए मैंने ग्रुप में खड़ा ही नही हुआ . उतने देर तक मैं गूगल डेवलपर का ताड़ता रहा .
इसके बाद कुछ और सेशन हुआ और कुछ  सबाल-जबाब  हुए इसके बाद इस सेशन को यही पर समाप्त कर दिया गया .

( 24/06/2019 , 05:55 PM , लेमन ट्री होटल ,पटना , होटल के बाहर   )

सुबह सब से मिलकर जितना  खुश थे , शाम में हम सब उतना ही उदास भी थे . लोगो से जुदा होने का समय हो चूका था .  सब लोग अपने -अपने घर जा रहे थे . लग रहा था हम लोगो का रिश्ता सिर्फ एक दिन का ही थी . लोग हाथे मिला रहे थे तो कुछ गले मिल कर जा रहे थे वैसे  कुछ लोग पहले भी चले गये थे परन्तु सब के दिल में एक ही बात का दुःख था . वो अलग होने का दुःख . दिन - भर में बहुत सारे दोस्त बन गये थे . सब लोग जाते समय अपना whatsapp नम्बर दे कर जा रहे थे .और बात करते रहने का वादे कर रहे थे .
   मैं भी लोगों से मिला और उन सब को विदा कर और उनसे विदा लेकर अपने गाँव वाली बस  पर  बैठ गया .

( 24/06/2019  , 07:30 PM  , नालंदा बिहार  )

शाम के सात से अधिक बज चुके थे . मैं अपने गाँव पहुँच चूका था . मैंने पीछे मुड़कर देखा . मेरे साथ कोई नही था .मैं अकेले गया और अकेले वापस आ गया . परन्तु मेरे साथ वहां के यादे और अनुभव अंदर से  कह रही थी - " मैं हूँ ना !"
मुझे लगता हैं जिन्दगी भी ऐसी ही हैं , लोग आते हैं , मिलते हैं , दोस्ती होती हैं ,रिश्ते बनते हैं और फिर .......... . हम कहीं खो जाते हैं .

©अविनाश अकेला 


दोस्त यह article कैसा लगा ? मुझे कमेंट करके जरुर बताये .

5/Post a Comment/Comments

कमेंट करने के लिए दिल से आभार

  1. Love You Brother.....:Ajay Kumar Chaudhary

    ReplyDelete
  2. जितनी जल्दी हो सके इस पोस्ट को पूरा कीजिये ताकि बीच मे मज़ा किरकिरा न हो।
    मैं नीरज जो आपको वेबमास्टर कॉन्फ्रेंस हॉल पटना में मिला था।
    धन्यवाद सर जी अर्टिकल लिखने के लिए।
    और हाँ, आप भी किसि हीरो से कम नही है।
    और रही बात लड़कियों की संख्या कम होने की तो वो भी एक चिंताजनक बात है।
    हो सकता है कि कुछ लड़कियां आना चाहती हो, लेकिन उनके घरवालो ने जाने/आने से इनकार कर दिया हो।

    कुछ भी हो सकता है

    ReplyDelete
    Replies
    1. नीरज जी आपको दिल से धन्यवाद. मैं कोशिश करूंगा कि जल्द - जल्द इस पोस्ट की अगली कड़ी को भी published कर दूँ .

      Delete
  3. अभिनाश जी जितना जल्दी हो सके पोस्ट को पूरा कीजिये। और हा आपसे दूसरी बार मिलके अच्छा लगा ।।

    ReplyDelete

Post a Comment

कमेंट करने के लिए दिल से आभार

Before Post Ads

After Post Ads